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अंग दान से बढ़कर कुछ भी दान नहीं : राष्ट्रपति

By HindusthanSamachar | Publish Date: May 29 2018 8:53PM
अंग दान से बढ़कर कुछ भी दान नहीं : राष्ट्रपति

नई दिल्ली/सूरत, 29 मई (हि.स.)। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कहना है कि अंग दान किसी भी तरह के दूसरे दान से बढ़कर है। अंगदान से केवल एक व्‍यक्‍ति को ही नहीं बल्‍कि पूरे परिवार को नया जीवन मिलता है। जीवित रहते या मृत्‍यु के बाद यह नश्‍वर शरीर या इसका कोई अंग किसी को नई ज़िन्‍दगी दे, यह संकल्‍प लेने वाला व्‍यक्‍ति जीवन-दाता का दर्जा पा जाता है। श्री कोविंद ने यह बात ‘डोनेट लाइफ ’ संस्था द्वारा सूरत में आयोजित एक समारोह में कही। श्री कोविंद ने कहा कि मृत्‍यु के पश्‍चात अपने शरीर के ऐसे अंगों का दान, जो किसी अन्‍य व्‍यक्‍ति के शरीर में प्रत्‍यारोपित किए जा सकें, विशेषकर उन लोगों को नया जीवन देता है जिनका कोई अंग, किसी दुर्घटना या गंभीर रोग के कारण खराब हो गया हो और किसी भी प्रकार की चिकित्‍सा से ठीक न हो सकता हो। श्री कोविंद ने कहा कि दुनियाभर में चिकित्‍सा-विज्ञान ने बहुत प्रगति की है। अंग-दान और अंग-प्राप्‍ति की उन्‍नत विधियां विकसित कर ली गई हैं| अंगदान मृत्यु की एक निश्चित समय सीमा में किया जाना होता है। इसमें समय का और पहले से तैयारी का विशेष महत्‍व है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के लिए अंगदान और देहदान करना कोई नई बात नहीं है। महर्षि दधीचि द्वारा लोक कल्‍याण के लिए अस्‍थि-दान किए जाने का उदाहरण मिलता है। अभी कुछ सामाजिक मान्‍यताओं और मिथकों के कारण देश में अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी दिखाई देती है। 125 करोड़ से अधिक की आबादी वाले इस देश में लाखों लोग अंग प्रत्‍यारोपण की प्रतीक्षा सूची में हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार केवल किडनी प्रत्‍यारोपण के लिए ही 20 लाख से अधिक लोग प्रतीक्षा सूची में हैं। इसी प्रकार से लीवर के लिए एक लाख से अधिक लोग प्रतीक्षा सूची में हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि स्‍थिति में धीरे-धीरे सुधार आ रहा है। जैसे-जैसे जागरूकता बढ़ रही है, अधिक से अधिक लोग अंगदान के लिए आगे आ रहे हैं। राष्ट्रपति ने नवम्बर, 2017 में दधीचि देहदान समिति के लोगों को राष्ट्रपति भवन बुलाकर सम्मानित करने का प्रसंग याद करते हुए कहा कि अंगदान के लिए जन सामान्‍य को प्रेरित करने और जागरूक बनाने का काम मानवता की सेवा का काम है। सामाजिक संस्‍थाओं, कॉलेजों, चिकित्‍सा संस्‍थानों का प्रयास यह होना चाहिए कि वे लोगों को अंगदान और देहदान की प्रक्रिया के बारे में, उनकी भाषा में, सरल से सरल शब्‍दों में जानकारी दें और उन्‍हें अंगदान के लिए प्रेरित करें। डोनेट लाइफ’ संस्‍था के द्वारा केवल 2017 में ही 127 लोगों को नया जीवन प्रदान किए जाने को उन्होंने अनुकरणीय उदाहरण बताया। गुजरात की यह संस्‍था अब तक कुल मिलाकर 582 लोगों की जिंदगी में परिवर्तन ला चुकी है। हिन्दुस्थान समाचार/जितेन्द्र तिवारी/राधा रमण

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